सिग्नल-फ्री सफर से मिलेगी राहत, जाम की समस्या का ‘बाईपास’ समाधान
नई दिल्ली। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे का इंट्री प्वाइंट दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर, यहां से एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलते ही वाहन सिग्नल-फ्री उड़ान भरने लगा। करीब 12 बजे शुरू हुआ सफर दिल्ली और यूपी होते हुए उत्तराखंड में करीब 3:00 बजे खत्म हुआ। दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से गांधी नगर मार्केट की करीब ढाई किमी की दूरी में स्थानीय और बाहरी ट्रैफिक साथ-साथ निकलता रहा लेकिन आगे एक्सप्रेस वे का डेडिकेटेड कॉरिडोर में वाहनों की आपसी उलझन भी दूर हो गई। एक के बाद एक पड़ने वाले निकास, प्रवेश मार्ग पर एक्सप्रेस वे से बाहर निकलते और अंदर आते वाहनों ने भी कोई अड़चन नहीं पैदा की। पहला निकासी मार्ग खजूरी खास पर दिखा। यहां से वजीराबाद, दिल्ली-करनाल रोड की तरफ जाने वाले एक्सप्रेस वे छोड़ते नजर आए। फिर भी, मेन एक्सप्रेस वे पर रफ्तार बरकरार रही। राजधानी की सरहदों पर रेंगते वाहनों की कतारें नदारद दिखीं। दिल्ली में होते हुए भी यह साफ-साफ महसूस हुआ कि यह एक सड़क भर नहीं, एक्सप्रेस वे राजधानी की जाम से कराहती धमनियों की बाईपास सर्जरी सरीखी है। आगे शामली की तंग गलियों की फांस, सहारनपुर का जाम और इसमें खराब होता घंटों का वक्त-अब बीते दिनों की बात होने जा रही है। फर्राटा भरते वाहन आसानी से अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते जा रहे थे। बीच-बीच में कुंडली-गाजियाबाद-पलवल एक्सप्रेस वे, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, हरिद्वार-रूड़की समेत 16 एंट्री और एग्जिट पर वाहनों के प्रवेश व निकासी ने भी सीधे गुजरने वाले वाहनों की रफ्तार पर ब्रेकर नहीं बन रहे थे।
ट्रैफिक को रि-रूट करेगा
एक्सप्रेस वे सभी शहरों के ट्रैफिक को रि-रूट करेगा। मतलब साफ है कि मौजूदा सड़कों के वाहनों का दबाव इससे कम होगा। यह दिल्ली-एनसीआर के उन यात्रियों को, जिन्हें उत्तराखंड जाना है, गाजीपुर बॉर्डर, आनंद विहार या गाजियाबाद के घनी आबादी वाले इलाकों से अब नहीं गुजरना पड़ेगा। पंजाब और हरियाणा से आने वाले वाहन कुंडली-गाजियाबाद-पलवल एक्सप्रेस वे से सीधे इस कॉरिडोर से निकल सकेंगे। इनको दिल्ली में एंट्री नहीं करनी पड़ेगी। इसका सीधा फायदा दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा पर भी पड़ेगा।
ई-रिक्शा और ऑटो एक्सवेरा पर बैन, लेकिन रास्ते में दिखे
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर ई-रिक्शा, ऑटो, ट्रैक्टर समेत धीमी रफ्तार से चलने वाले वाहनों की पाबंदी है। एनएचएआई की टोल की लिस्ट में यह सूचीबद्ध भी नहीं हैं। फिर भी, पूरे रास्ते पर इनकी आवाजाही देखी गई।दिल्ली वाले हिस्से में ई-रिक्शा और ऑटो जगह-जगह दिखे, जबकि बागपत से आगे सहारनपुर बाई पास तक ट्रैक्टर धड़ल्ले से चलते रहे। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मसले पर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। दुर्घटना की आशंका को देखते हुए धीमी रफ्तार के वाहनों को इस पर चलने इजाजत नहीं होगी।
ऑल वेदर सफर के लिए तैयार रहेगी सड़क
सड़क को ऑल वेदर बनाए रखने के लिए फॉग लाइटिंग की सुविधा है। वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर में मानसून के समय पहाड़ों के दरकने की समस्या दूर रखने के लिए जल निकासी की व्यवस्था की गई है ताकि पानी एक जगह एकत्र न हो सके। शिवालिक पहाड़ों की संवेदनशीलता को देखते हुए सड़क को कंपनमुक्त बनाने के साथ ही सड़कों को नो हॉकिंग जोन और नॉइस बैरियर लगाकर आवाज नियंत्रित किया गया है।
गूगल मैप दे रहा धोखा
ऐसे में अगर आप हाल के दिनों में यात्रा की योजना बना रहे हैं तो गूगल मैप की जगह सड़क के संकेतकों के सहारे ही अपना सफर पूरा कीजिए। सड़क नई होने के चलते अभी तक गूगल मैप पर दर्ज नहीं है। गूगल मैप पर आश्रित युवाओं के लिए यह सड़क अबूझ पहली लगेगी।
वीडियो गेम सी सड़क
अद्भुत इंजीनियरिंग और आंखों को सुकून देते दृश्य इस सफर पर वीडियो गेम जैसा माहौल बना देते हैं। 100 की रफ्तार से चलती गाड़ी से कब मैदान से पहाड़ के दरवाजे खुल जाते हैं पता ही नहीं चलता। करीब 4 बजे सहारनपुर बायपास पर मैदान में दौड़ रही कार पांच बजे से पहले ही पहाड़ों के बीच ऊंचे दरख्तों के बीच ठंडी हवा में पहुंच जाती है।
अभी सफर करना है तो पेट्रोल और पानी साथ रखें
ग्रीनफील्ड और वाइल्डलाइफ कॉरिडोर पूरी तरह से नए बनाए गए हैं। ऐसे में इन लंबे स्ट्रेच पर न तो प्रसाधन है न ही पेट्रोल पंप या अन्य व्यवस्थाएं पूरी हो पाई है। ऐसे में अगर आप सफर पर निकल रहे हैं तो गाड़ी में ईधिन और पीने के पानी की व्यवस्था पूरी कर चलें। नई ग्रीनफील्ड सड़क पर अभी पेट्रोल पंप, टॉयलेट, फूड कोर्ट और रेस्ट एरिया जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चालू नहीं हुई हैं। साइनेज, लाइटिंग और छोटे-मोटे काम अभी चल रहे हैं, इसलिए स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन करें और रात की यात्रा में अतिरिक्त सावधानी बरते।
ईको फ्रेंडली सफर और सुरक्षा के लिए बेहतर इंतजाम
एक्सप्रेस-वे के सफर में सुरक्षा और लाइटिंग के लिए इको फ्रेंडली तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। सोलर पैनल के जरिए सीसीटीवी कैमरों और लाइटिंग के लिए बिजली की व्यवस्था की गई है। यहीं हर 20 किलोमीटर पर एसओएस की सुविधा दी गई है ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना पर जल्द मदद पहुंचाई जा सके। इसके अलावा कॉरिडोर पर 40-50 किलोमीटर पर आधुनिक सर्विस एरिया दिए गए हैं। इन सर्विस एरिया में साल के अंत तक वाहन चार्जिंग स्टेशन, फूट कोर्ट और पेट्रोल पंप की सुविधा दी जाएगी।
जन सुविधाओं का काम जारी
एक्सप्रेसवे पर जन सुविधाओं के लिए स्थान आवंटित हैं लेकिन अभी जन सुविधा और रेस्ट रूम सुचारू नहीं हुआ है। प्रसाधन और अन्य सुविधाओं के लिए भी काम चल रहा है। माना जा रहा है इन्हें चालू होने में दी से तीन माह लगेंगे।

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