CNG की बढ़ी कीमत, लाखों दिल्लीवासियों को महंगाई का झटका
नई दिल्ली: देश की राजधानी में रहने वाले आम नागरिकों के लिए आज का दिन आर्थिक रूप से भारी साबित हो रहा है क्योंकि तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ अब सीएनजी की कीमतों में भी जोरदार इजाफा कर दिया है। दिल्ली में सीएनजी के दाम में दो रुपये प्रति किलो की सीधी वृद्धि की गई है, जिससे स्वच्छ ईंधन पर निर्भर रहने वाले वाहन मालिकों को महंगाई का तगड़ा झटका लगा है। ईंधन के इन तीनों प्रमुख विकल्पों के एक साथ महंगे होने से न केवल व्यक्तिगत बजट बिगड़ेगा बल्कि परिवहन सेवाओं पर निर्भर लाखों लोगों की दैनिक लागत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
एनसीआर के शहरों में ईंधन की नई कीमतें और प्रभाव
कीमतों में हुए इस बदलाव के बाद दिल्ली में अब सीएनजी का भाव बढ़कर 79.09 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है, वहीं पड़ोसी शहर नोएडा और गाजियाबाद में यह दर 87.70 रुपये तक जा पहुंची है। केवल गैस ही नहीं, बल्कि पेट्रोल के दाम में भी प्रति लीटर 3.14 रुपये की बढ़ोतरी की गई है जिससे अब यह 97.91 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध होगा, जबकि डीजल 3.11 रुपये महंगा होकर 90.78 रुपये के आंकड़े को छू रहा है। गुरुग्राम और रेवाड़ी जैसे एनसीआर के अन्य इलाकों में भी इसी अनुपात में कीमतें बढ़ने से पूरे क्षेत्र में आवाजाही पहले के मुकाबले काफी महंगी हो गई है।
ऑटो और कैब चालकों की बढ़ती मुश्किलें तथा किराए में वृद्धि की आशंका
सीएनजी की दरों में इस उछाल का सबसे सीधा और गहरा असर दिल्ली-एनसीआर में चलने वाले लाखों ऑटो, टैक्सी और निजी कैब चालकों पर पड़ेगा जो पहले से ही परिचालन लागत बढ़ने से परेशान थे। वाहन चालकों के संगठनों का मानना है कि इतनी बड़ी वृद्धि के बाद वर्तमान दरों पर सेवाएं देना उनके लिए घाटे का सौदा साबित होगा, जिसके चलते वे जल्द ही किराए में बढ़ोतरी की मांग कर सकते हैं। यदि किराए में वृद्धि होती है, तो इसका अंतिम बोझ उन आम यात्रियों पर ही पड़ेगा जो अपने दफ्तर या अन्य कार्यों के लिए रोजाना सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेते हैं।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची महंगाई और मध्यम वर्ग की चिंताएं
ईंधन की इन नई दरों ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है क्योंकि पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ने का सीधा संबंध खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई लागत से होता है। जानकारों का कहना है कि परिवहन महंगा होने से आने वाले दिनों में फल, सब्जी और अनाज की कीमतों में भी तेजी देखी जा सकती है, जिससे रसोई का बजट और अधिक प्रभावित होगा। चार साल से अधिक समय के बाद हुए इस बड़े बदलाव ने जनता के सामने एक नई आर्थिक चुनौती पेश कर दी है जिससे निपटना फिलहाल आसान नजर नहीं आ रहा है।

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